वोट करें | क्या आप चाहते हैं कि अगली बार केंद्र में "आज़ाद समाज पार्टी" की सरकार बने

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साल 2014 में देश की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ भाजपा और उसके सहयोगी दलों को वोट दिया था। सबको उम्मीद थी कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश काफ़ी आगे जाएगा और सबका विकास होगा।

यही उम्मीद 2019 में भी दोहराई गयी और भाजपा दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। लेकिन फिर धीरे धीरे लोगों को ये एहसास होने लगा कि उनसे बहुत बड़ी भूल हो गयी है। क्योंकि मोदी सरकार के आने के बाद देश की जनता लगातार रोड पर ही है। कभी नोटबन्दी को लेकर कभी भारी जीएसटी को लेकर, कभी बलात्कार की घटनाओं पर सरकार की चुप्पी को लेकर कभी मोब्लिंचिंग तो कभी दलितों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर सरकार की चुप्पी को लेकर। और अब एनआरसी एनपीआर और संविधान बचाओ अभियान को लेकर।
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आज के इंटरनेट युग के कारण ये सबको पता है कि पिछले छः सालों में देश में बेरोजगारी और मंहगाई कितनी ज़्यादा बढ़ गयी है। जो पहले से ही बहुत अमीर थे वे अब और ज़्यादा अमीर हो चुके हैं और देश के अधिकतर लोग जो मीडियम क्लास के या गरीब थे वे अब बहुत ज़्यादा गरीब हो चुके हैं। लेकिन सरकार अब भी धर्म और जाति की राजनीति पर ही अटकी है। और बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान से छेड़छाड़ करने की कोशिशें हो रही हैं। इस बीच कई बार तो असमाजिक तत्यों द्वारा बाबा साहेब की मूर्ति को तोड़ने की भी घटनाएं हुईं लेकिन तब भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। जिस कारण दलित और अल्पसंख्यक समाज वर्तमान सरकार से काफी नाराज है।

ऐसे में समझा जा रहा है कि जनता फिर से बदलाव के मूड में है और अगली बार वो ऐसे व्यक्ति को केंद्र में भेजना चाहती है जो जनता का दुख दर्द समझता हो और जो सिर्फ विकास पर ध्यान दे ना कि धर्म जाति पर।

शायद इसी लिए लोगों का ध्यान आज़ाद पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण पर टिकी है। क्योंकि दलित और अल्पसंख्यक समाज में चंद्रशेखर रावण अपनी साफ सुथरी छवि के कारण काफी लोकप्रिय होते जारहे हैं। और वह चूंकि खुद दलित समाज से हैं तो जाहिर है वो बाबा साहेब के सपनों को साकार करने की पूरी कोशिश भी करेंगे।

इसी लिए कहा जा रहा है कि अगर दलित समाज और अल्पसंख्यक समाज एक हो जाएं तो अगली बार केंद्र में चंद्रशेखर की पार्टी "आज़ाद समाज पार्टी" की सरकार बनना निश्चित है।

तो फ्रेंड्स क्या आप भी चाहते हैं कि अगली बार केंद्र में "आज़ाद समाज पार्टी" की सरकार बने। वोट करें और इसको अधिक से अधिक शेयर करें ताकि दूसरे लोग भी इस सर्वे में हिस्सा ले सकें, धन्यवाद।

क्या आप चाहते हैं कि अगली बार केंद्र में "आज़ाद समाज पार्टी" की सरकार बने ?
हाँ
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अभी वोट करें | Yes Bank का डूबना और देश की गिरती अर्थव्यवस्था क्या मोदी सरकार की नाकामियों को दर्शाता है

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नोट:
1) वोट करते समय ध्यान रखें कि आप देशहित में वोट कर रहे हैं।
2) एक घन्टे में 2 बार ही वोट किया जा सकता है, तीसरा चौथा वोट करने के लिए एक घन्टा बाद दुबारा विजिट करें।
3) अधिक से अधिक वोट करके अपना पक्ष मजबूत करें।
3) Other पे क्लिक करके आप Comment भी कर सकते हैं।
4) वोट करने के बाद Other पे दुबारा क्लिक करके आप अपना और दूसरे पाठकों के Comments भी पढ़ सकते हैं।
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देशहित में वोट करें
हाँ
नहीं
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अभी वोट करें, क्या आप BJP के साथ हैं

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अभी हाल ही में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में देश की सबसे बड़ी पार्टी BJP को करारी हार का सामना करना पड़ा था। जबकि चुनाव प्रचार में बीजेपी के सारे स्टार प्रचारक यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के इलावा बीजेपी के सारे बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया था और वोटरों को लुभाने का हर संभव प्रयास किया था। लेकिन इन सबके बावजूद बीजेपी के खाते में 70 में से सिर्फ 8 सीटें ही आयी और 62 सीटें जीत कर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।

हार के बाद गृहमंत्री और राजनीतिक के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने अपने नेताओं के भड़काऊ बयान को हार का मुख्य कारण बताया था।

हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा भड़काऊ बयानों का सिसिला जारी रहा। और फिर एक दिन दिल्ली में दंगे की आग भड़क उठी और एक आंकड़े के मुताबिक 40 से अधिक लोग मारे गए करोड़ो की संपत्ति जल कर राख हो गयी।

वैसे तो अभी तक दंगों के मूल कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार चाहती तो दंगे को इतना भयानक रूप लेने से रोका जा सकता था। वहीं दूसरी ओर बहुत सारे लोगों का कहना है कि ये बीजेपी को बदनाम करने की साज़िश है। और दिल्ली में हार और दंगे के बावजूद वे बीजेपी का साथ नहीं छोड़ेंगे।
तो फ्रेंड्स आपको क्या लगता है। क्या आप बीजेपी के साथ हैं ??
नोट: ये सोचकर वोट करें कि आप देशहित में वोट कर रहे हैं।
आप हर घन्टे 2 वोट कर सकते हैं, इसलिए अधिक से अधिक वोट करें, धन्यवाद।
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देशहित में वोट करें, क्या आप BJP के साथ हैं ?
हाँ
नहीं
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ट्रम्प का मोदी प्रेम - हकीकत या दिखावा |VIDEO|

|VIDEO| सुनें इस लड़की की बेबाक आवाज़, संविधान खतरे में है

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दोस्तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक Share करें, ताकि इस बहन की बेबाक आवाज़ हमारी सरकार तक पहुंच जाए
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|VIDEO| देखिए इस हिन्दू महिला ने NRC, NPR और CAA के बारे में क्या कहा

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दोस्तों इस पोस्ट को अधिक से अधिक Share करें ताकि इस बहन की आवाज़ पूरे हिंदुस्तान में पहुंच जाए।
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Atal Bihari Vajpayee - The Great Politician And Poet, अटल बिहारी वाजपेयी

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और जाने माने कवि श्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे। आज गुरुवार 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स में उनका देहांत हो गया। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था।
पिछले 24 घण्टे से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी, और उन्हें एम्स में फूल लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था।
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Atal Bihari Vajpayee The Great Politician And Poet

अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में एक बार पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि ये आदमी एक दिन बहुत आगे जाएगा और भारत का प्रधानमंत्री बनेगा। उस वक्त खुद जवाहरलाल नेहरू ने भी नहीं सोचा रहा होगा ये सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं बनेंगे बल्कि अपनी पार्टी को शिखर तक ले जाएंगे।





अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। उनकी ये बात शत प्रतिशत सही साबित हुई और आज केंद्र की सत्ता से लेकर 20 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं।
जनसंघ, जनता पार्टी और बाद में बीजेपी की नींव रखने वालों में एक प्रमुख नाम अटल बिहारी वाजपेयी का भी है, बीजेपी का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ था और उस वक्त लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में महज़ दो सीटें ही आई थी।
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अटल बिहारी वाजपेयी 1942 में उस समय राजनीति में आए जब उनके भाई भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिनों के लिए जेल गए हुए थे। वाजपेयी ने आरएसएस के सहयोग से 1951 में भारतीय जनसंघ पार्टी बनाई जिसमे श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेता शामिल हुए।
वाजपेयी पहली बार 1957 में बलरामपुर संसदीय छेत्र से चुनाव जीत कर राज्यसभा के सदस्य बने। 1968 में वो राष्ट्रीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, उस समय पार्टी में लाल कृष्ण आडवाणी, नानाजी देशमुख और बलराज मधोक जैसे नेता थे।
आपातकाल के दौरान वाजपेयी व अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि वे इंदिरा गांधी का विरोध कर रहे थे, उस समय 1977 में जनता पार्टी के महानायक जय प्रकाश के नेतृत्व में आपातकाल का विरोध हो रहा था जिसमें वाजपेयी भी शामिल थे।
जेल से छूटने के बाद वाजपेयी ने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर लिया, जिससे पार्टी अधिक मजबूत हो गई। 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की जीत भी हुई और वे मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मामलों के मंत्री भी बने।
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Atal Bihari Vajpayee The Great Politician And Poet

शायद ये बहुत कम लोगों को पता हो कि विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी पहले ऐसे नेता बने जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासंघ को हिंदी भाषा मे संबोधित किया था। हालांकि 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई लेकिन तब तक वाजपेयी अपनी पहचान अनुभवी नेता और वक्ता के रूप में बना चुके थे।
उसके बाद पार्टी में अंतर्कलह शुरू हो गया और पार्टी बिखर गई, फिर 1980 में वाजपेयी अपने पुराने दोस्तों के साथ जनता पार्टी छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए और भारतीय जनता पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वे कांग्रेस के सबसे बड़े आलोचको में शुमार किये जाते थे। बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद वे लगातार पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करते रहे।





1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, हालांकि संसद में पूर्ण बहुमत साबित ना कर पाने के कारण उनकी सरकार 13 दिनों में ही गिर गई।
दोबारा 1998 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को अधिक सीटें मिली और कुछ अन्य पार्टियों के सहयोग से वाजपेयी ने एनडीए का गठन किया और दूसरी बार प्रधानमंत्री बने लेकिन बीच मे ही जयललिता की पार्टी ने सरकार का साथ छोड़ दिया और 13 महीने में ही वाजपेयी सरकार फिर से गिर गई।
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लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की शख्सियत हार मानने वालों में नहीं थी, वे लगातार प्रयास करते रहे, खुद को और पार्टी को अधिक मजबूत बनाते रहे। 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी फिर से सत्ता में आई, वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और अपना कार्यकाल भी पूरा किया।

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आज बीजेपी कितनी मज़बूत स्थिति में है ये पूरी दुनियां जानती है और इसका श्रेय भी अटल बिहारी वाजपेयी को ही जाता है।
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Mirchi Lagi To Mai Kya Karu - 2, खुलासा ख़बरों का

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हेलो फ्रेंड्स, मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ सिरीज़ में आपका फिर से स्वागत है, इस सीरीज के पिछले अंक में चर्चा हुई थी भारत के बेस्ट कॉमेडियन्स के बारे में, और सारी बातों के बाद यही निष्कर्ष निकाला था कि भारत के बेस्ट कॉमेडियन्स माने जाने वाले जॉनी लीवर, राजपाल यादव, परेश रावल, कादर खान आदि आदि तो कुछ भी नहीं हैं, असली कॉमेडियन्स तो हमारे नेता लोग हैं जो अपनी कॉमेडी से अच्छों अच्छों को उल्लू बना देने की कला रखते हैं।




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आज का अंक उसी की अगली कड़ी है, लेकिन ये पोस्ट पिछले सारे पोस्टों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसमें मेरा लिखा कुछ भी नहीं है, इस अंक में जो कुछ भी आप पढ़ेंगे वे सब सोशल मीडिया से लिये गए हैं।
जैसा कि आप ने देखा होगा सोशल मीडिया पे नेताओं के कार्टून्स, मीमस या उनकी उलटे सीधे बयान वायरल होते रहते हैं, मैं उन्हीं वायरल बयानों और कार्टून्स को आपके लिए लेकर आया हूँ, पढ़ें और मज़े लें।
1) तमल थिलेगा तमल:
83 रुपये का पेट्रोल डलवाने के बाद मैंने जैसे ही गाड़ी स्टार्ट किया कि सायलेंसर से आवाज़ आई- तमल थिलेगा तमल।
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2) पकौड़े नहीं जूस बेचो:
मित्रों,
गर्मी शुरू हो चुकी है, इसलिए पकौड़े के पीछे ना पडे रहें और जूस बेचें।
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3) दम मारो दम:
बाबाओं के मंत्री बनने के बाद सदन की कैंटीन में एक और मेंनू बढ़ गया है
गांजा।
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4) कोई सहारा ना रहा:
कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा,
हम किसी के ना रहे, कोई हमारा न रहा।
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5) राजा या व्यापारी:
मैं गुजराती हूं, मेरे खून में व्यापार है - प्रधानमंत्री
जहां का राजा व्यापारी, वहां की प्रजा भिखारी - चाणक्य।
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6) हाहाहा:
संबित पात्रा की पत्नी- उठ जाइये जी, सुबह हो गई
संबित पात्रा- अच्छा तो अब भारत में हम हिंदुओं को चैन से सोने का भी हक़ नहीं है?
सुन बे मुल्ली मंदिर वहीं बनेगा।
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7) जशोदाबेन के बच्चे:
मोदी जी के सारे वादे अगर सच्चे होते,
तो आज जशोदाबेन के भी बच्चे होते।
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8) ये कैसा व्यापार:
ट्रम्प- मोदी भाई, मैंने सुना है कि आप ने लालकिला, ताजमहल ठेके पर चढ़ा दिए, ये कैसा राष्ट्रवाद है?
मोदी- ट्रम्प भाई, आप भी सही बोली लगाओ, पूरा भारत आपके नाम लिख दुंगा, व्यापार मेरे खून में है।
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9) देशभक्त:
सुबह का गुंडा अगर अगर शाम को बीजेपी जॉइन करले तो उसे गुंडा नहीं देशभक्त माना जाएगा।
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10) भारत बहुत जल्द तेल के छेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा:
मित्रों, मैं मंहगाई बढ़ा बढ़ा कर जनता का इतना तेल निकाल दुंगा की जल्द ही भारत तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
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अभी तो सत्ता पक्ष को ही दिखाया गया है, विपक्ष तो अभी बाकी है।
इंतज़ार करें हमारे अगले पोस्ट का, जय हिंद जय भारत।
नोट: ये लेख Mirchi Lagi To Mai Kya Karu केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है, हमारा मकसद किसी का पक्ष लेना या किसी का मज़ाक बनाना नहीं है, इस लेख में कार्टून के माध्यम से जो कुछ भी दिखाया गया है ज़रूरी नहीं कि वो सच ही हो।
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Mirchi Lagi To Mai Kya Karu, खुलासा ख़बरों का

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मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ





क्या आप ने कभी सोचा है:
अगर कॉमेडी ना होती तो क्या होता?
सोचो सोचो
दिमाग लगाओ
क्या हुआ? नहीं समझ में आया?
रहने दो यार,
दिमाग होगा तब तो लगाओगे
अबे ढ़क्कन,
Tv देखते हो ना?
न्यूज़ चैनल देखते हो ना?
फिर भी इतनी छोटी सी बात नहीं जानते?
ज़रा सी बात है
अगर कॉमेडी ना होती तो
हमारे बहुत सारे नेताओं के सामने
भुखमरी की नौबत आ चुकी होती।
खुद देखिए।
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Mirchi Lagi To Mai Kya Karu

एक दुखी पति ने
अमित शाह को फोन करके पूछा
सर जी, आप शादी का गठबंधन भी
तुड़वाते हो क्या?



👉 जलता हिंदुस्तान, कौन है असली गुनाहगार

800 साल मुग़लों का राज रहा,
200 साल अंग्रेजों का राज रहा,
इतने सालों तक एक धर्म विशेष के लोग
महफूज़ रहे, लेकिन
अब जब प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक
उसी धर्म के हैं, फिर भी कुछ नेता कहते हैं
हमें वोट दो, क्योंकि हमारा धर्म खतरे में है।

👉 मैं भारत की बेटी हूं, आओ अपनी प्यास बुझालो
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साला एक बात मुझे समझ में नहीं आ रही
कर्नाटक चुनाव से पहले कांग्रेस के 3 मुख्यमंत्री थे
अब कर्नाटक में फिर से सरकार बनाने के बाद

Cm योगी कहते हैं
अपराधी यूपी छोड़ कर भाग रहे हैं
लेकिन ये नहीं बताते कि उनमें से आधे
विधानसभा पहुंच चुके हैं।

हमारे एक नेता का कहना है
पाकिस्तान की हर गोली का जवाब
अब हम गोले से देंगे।
सो तो ठीक है चाचा, पर कब दोगे?
विपक्ष में आने के बाद?

👉 औरत का सफरनामा

हद्द है यार:
नोटबन्दी को विपक्ष रोक नहीं पाया,
GST भी लागू हो गई,
भारी विरोध के बावजूद 3 तलाक पर
कानून बनाने में सफल रहे,
कई राज्यों में बिना बहुमत के सरकार बना ली,
फिर भी कहते हैं
विपक्ष राम मंदिर नहीं बनने दे रहा।

आज सुबह चाय की दुकान पर एक सज्जन
बोल रहे थे कि वो तो भला हो अमित शाह का
कि वे विदेशी दौरों पर नहीं जाते, वरना
अब तक 5-7 देशों में भाजपा की सरकार होती।

कोई बोलता है हिन्दू खतरे में है,
कोई बोलता है मुसलमान खतरे में है,
एक बेटी बोली मैं किधर जाऊं,
मेरी तो सुबह शाम खतरे में है।

अभी अभी:
विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि
जिन्ना फिर से अपनी कब्र में वापस चला गया है
और जाते जाते कह गया है कि
अगले चुनाव से पहले फिर से आएगा
और अकबर, औरंगज़ेब को भी साथ लाएगा।
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और अंत में:
दोस्तों, ये तो आप भली भांति जान गए होंगे कि
अगर कॉमेडी ना होती तो क्या होता,
अब एक सवाल आप से
भारत के बेस्ट कॉमेडियन का नाम बताएं
कृपया अपना जवाब शालीन शब्दों में दें
और अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें,
याद रखें, हमारी परवरिश कैसे हुई है इसका पता
हमारी बोलचाल से लग जाता है।





👉 इंसान का मनोविज्ञान
👉 दुनियां भर की रोचक जानकारियां
👉 शायरी की डायरी
👉 हंसी मज़ाक, चुटकुले


नोट: ये लेख Mirchi Lagi To Mai Kya Karu मात्र मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है
अगर इस लेख के किसी शब्द या अंश से किसी की
भावनाएं आहत हुई हों तो हम उसके लिए
खेद व्यक्त करते हैं।
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Mai Bharat Ki Beti Hu, Aao Apni Pyas Bujhalo

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News Expose सिरीज़ में आपका फिर से स्वागत है, इस सिरीज़ के पिछले अंक में मैंने बिहार बंगाल दंगों, और सीरिया के बारे में बताया था कि कैसे हम गंदी राजनीति के शिकार हो रहे हैं, (पढ़ें: Dirty Politics in Hindi) इस अंक में जिस टॉपिक पर मैं बात करने वाला हूँ वो भी दरअसल गंदी राजनीति का ही एडवांस रूप है।
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बलात्कार, बलात्कार, बलात्कार...
दर्दनाक मौत, भारत माता की जय, वंदे मातरम...
आजकल हमारा पूरा देश इन्हीं शब्दों को सुन रहा है, पूरा देश अपनी मासूम बेटियों को लेकर चिंतित है की कल को कहीं उनके साथ भी कोई अप्रिय घटना न घट जाए, और वे खेलने कूदने की उम्र में ही किसी नेता, किसी बाबा या किसी वहशी द्वारा रौंद न दी जाए... आज पूरी दुनियां हमपे हंस रही है, थू थू कर रही है।



वैसे तो बलात्कार की घटनाएं कोई नई नहीं है, इससे पहले भी होती रही हैं, हमारे देश में तो द्रोपदी के चीर हरण जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन अभी जो कुछ भी हो रहा है वैसा शायद पहले कभी नहीं हुआ।
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ये शायद पहली बार हुआ है कि किसी 8 साल की मासूम के साथ रेप की घटना मंदिर में हुई हो, भगवान के सामने हुई हो..
ये भी पहली बार हुआ है कि किसी रेप पीड़िता के पिता को इंसाफ देने के बजाए उसे पुलिस कस्टडी में मार दिया गया हो...
ये भी पहली बार हुआ है कि दोषियों को बचाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हों, दोषियों को बचाने के लिए भारत माता की जय के नारे लग रहे हों और तिरंगा का सहारा लिया जा रहा हो...
और ये भी पहली बार हुआ है कि जिस देश में इतनी दर्दनाक घटनाएं घटी हों उस देश के प्रधान मंत्री के मुंह से एक शब्द ना निकला हो... ज्ञात हो कि हमारे प्रधान मंत्री की गिनती खुल कर बोलने वाले नेताओं में होती है और वे औरतों के हक की बात करने का दावा करते हैं, लेकिन आज जब देश की बेटियों को उनकी जरूरत है तो वे मौन व्रत रख हुए हैं, पता नहीं वे इन घटनाओं से आहत हो कर अवसाद में चले गए हैं या ये 2019 की तैयारी है, आश्चर्य है जब जब देश में कोई ऐसी घटना घटती है जिसमें पीडित पक्ष किसी धर्म विशेष या जाति विशेष का हो तो वे खामोशी का आँचल ओढ़ कर गायब हो जाते हैं।
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यहां मैं एक और बात बताना चाहूंगा मैं मोदी जी का बहुत बड़ा फॉलोवर रहा हूँ, उनके PM बनने के बाद से नहीं बल्कि उससे बहुत पहले से, उनकी पर्सनालिटी में कई ऐसी बातें हैं जो मुझे बहुत आकर्षित करती रही हैं, मैंने ट्विटर पर अकॉउंट ही बनाया था उनको फॉलो करने के लिए, मेरी नज़र में उनकी छवि एक जुझारू और ईमानदार नेता की रही है,
लेकिन जैसे जैसे मैं उनको जानता गया...... खैर जाने दिजीए।



दोस्तों, हमारा देश ऋषि मुनियों का देश रहा है, यहां औरतो को देवी का दर्जा दिया जाता है और उनकी पूजा होती है, यहां किसी अनजान लड़की को भी बहन बुलाने का रिवाज रहा है, किसी भी औरत को माता कहने का रिवाज रहा है...
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लेकिन ये सब बीती बातें हो चुकी हैं, अब सब कुछ बदल चुका है, हमारा देश बदल चुका है, हमारी परंपराएँ, हमारे संस्कार और हमारी सोच बदल चुकी है, अब सबकुछ को राजनीति और धर्म जाति के चश्मे से देखा जाता है।

अब बहन सिर्फ वो होती है जो अपनी खुद की माँ की कोख से जन्मी हो, अब माँ सिर्फ वो होती है जिसने हमें जन्म दिया हो, कोई लड़की तभी हमारी बहन बेटी होती है अगर वो हमारे धर्म की हो हमारी जाति की हो... बाकी सारी लड़कियों को भोग की वस्तु समझा जाने लगा है...
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निर्भया की मौत के बाद जब हम सारे लोग एकजुट होकर सड़कों पर उतरे थे तो लगा था अब ऐसा हादसा नहीं होगा, इस देश की बेटी को अब से वो सब नहीं सहना पड़ेगा जो निर्भया ने सहा... लेकिन आज के हालात को देखते हुए लगता है ये शायद कभी नहीं हो पाएगा, क्योंकि अब हम एकजुट नहीं रहे, हम टुकड़ों में बंट चुके हैं, अब हम हिंदुस्तानी नहीं रहे, अब हम राजपूत बन चुके हैं, अब हम ब्राह्मण बन चुके हैं, अब हम दलित बन चुके हैं, अब हम वैश्य बन चुके हैं, अब हम हिन्दू बन चुके हैं मुसलमान बन चुके हैं....।
हम बदल चुके हैं हमारी सोच बदल चुकी है...
जितना हमने निर्भया के लिए लड़ा था उतना न आसिफा के लिए लड़े ना उन्नाव की बेटी के लिए लड़े, लड़ें भी तो क्यों लड़ें?
आसिफा मुसलमान के घर जन्मी थी तो हम हिन्दू होकर मुसलमान के लिए क्यों लड़ें, उन्नाव की बेटी हिन्दू के घर जन्मी थी तो हम मुसलमान होकर हिन्दू के लिए क्यों लड़ें?? जिसके साथ जो हो रहा है होने दो बस ऊपर वाला मेरी बेटी को बचाए रखे.. यही आज की हमारी मानसिकता हो चुकी है, हम सिर्फ गिरे नहीं हैं बल्कि गन्दे नाले में जा चुके हैं।
अब बेटियों के लिए सलामत रहने का बस एक ही ऑप्शन रह गया है कि वे पैदा ही ना हों...।
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अभी तक की जानकारी के मुताबिक आसिफा को सिर्फ इसलिये वहशीपन का शिकार होना पड़ा ताकि वो जिस समुदाय से आती है उनको सबक सिखाया जाए, वे लोग जगह छोड़ कर चले जाएं, 
8 साल की मासूम को क्या पता धर्म क्या होता है जाति क्या होती है? और कितने शर्म की बात है कि इस हैवानियत का मास्टरमाइंड एक रिटायर्ड अधिकारी है, और उससे भी बड़ी बात सारा खेल मंदिर के अंदर खेला गया, उस मासूम को नशे की दवा दे दे कर दरिंदे उसके साथ बलात्कार करते रहे और बाद में सिर कुचल कर मार डाला।
शर्म आती है खुद को ऐसे समाज का हिस्सा कहते हुए।
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उन्नाव की बेटी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, वो ज़िंदा तो बच गयी पर इंसाफ मांगे तो किससे? उसके पिता इंसाफ मांगने गए थे तो उनको सीधा ऊपर ही भेज दिया गया।



कहां है वो लोग जो कुछ वक्त पहले पद्मावती की इज्जत बचाने के लिए सड़कों पर उतरे थे ?
अब कहाँ गई करनी सेना या बजरंग दल ?
पद्मावत फिल्म का सीन ज़्यादा शर्मनाक था या फिर एक जिंदा बेटी का
गैंग रेप ?
क्या इन बेटियों की इज्जत से उनका कोई लेना देना नहीं ?
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अभी भी वक्त है संभल जाओ,
अपनी नीची सोच और गंदी राजनीति से बाहर आओ,
वरना कल को तुम्हारी बहन बेटियां भी सरे बाज़ार लुट जाएंगी और तुम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाओगे,
क्योंकि आज तुम्हारी मानसिकता अपाहिज है, कल को किसी और की मानसिकता अपाहिज हो चुकी होगी।
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